आप बस यही सोचिये कि जीवन में अगर भगवन को मिलने का मन करे तो क्या करेंगे ...सिर्फ एक कम कि हम अपने देश को इतना खुबसूरत बना दे कि भगवन यही पर आ जाये और यह तभी होगा जब हर रत्नों से बढ़ कर अपने मत का प्रयोग करे और इस बार होने वाले विधान सभा चुनाव में एक ऐसे व्यक्ति को जितने का प्रयास करे जो जाति, धर्म , क्षेत्र , पार्टी से ऊपर इस लिए अपने लिए वोट मांगे क्योकि वो देश के लिए कुछ करना चाहता है और वो यह चाहता है कि अगर वह विधयक बनेगा तो कभी कोई पैसा न खायेगा न बर्बाद करेगा ...क्या इस बार आप अपने सभी उमीदवारो से शपथ पत्र मांगेंगे कि पहले लिखित दो कि तुम जन सेवक बन कर रहोगे ना कि हमारे राजा बन कर रहोगे ..अस्पताल के आपात काल कि तरह जब कोई नागरिक आपके दरवाजे पर जायेगा तो बिना किसी समय को गवाए आप उसके लिए काम करेंगे .क्या हम सब इतना साहस कर पाएंगे......क्या आप को लगता है कि उमीदवार और आप दोनों एक ही संविधान से आच्छादित है / मानते है ..अखिल भारतीय अधिकार संगठन आप से अपील करता है कि इस बार जग जाइये ..और भारत में पैदा होने का क़र्ज़ अदा कर दीजिये ..अखिल भारतीय अधिकार संगठन
Saturday, December 24, 2011
just think about this country and cast your vote in coming election
आज रो धो कर उत्तर प्रदेश में चुनाव की तिथि घोषित हो गई ...एक ऐसा खेल जिसमे खेलने वाले कोई रूचि नही लेते और जो मदारी है वही इस खेल को अपने अनुसार चला कर खेल के बादशाह बन जायेंगे .........एक अलोक चुप चाप भारत नाम के औअर्ट के इस रूप को और घिनौना होता देखता रहूँगा .....क्या हम सब कसम खा चुके है कि कभी औरत के किसी रूप का सम्मान नही करेंगे ....क्या आपको कभी उस औरत की चीख सन्नाटो में नही सुनाई देती जिसे आप सब ने (मैंने भी ) माँ कहा था , है ......आप सभी एक क्लेर्क , बाबु बन कर, प्रसाशनिक अधिकारी बन कर अपने पर गर्व करते है ......आप को ऐसा लगता है आपने अपने माँ बाप का नाम रोशन किया है ...यही नही हम सब के माँ बाप को भी लगता है कि उनके बच्चो ने उनका नाम उचा कर दिया .............इस देश में नेता बन न कभी एक भविष्य निर्माण के रूप में नही रहा .......जिस के कारन वो बच्चे जिन हे पढाई में मन नही लगा ..समय काटने के लिए जो होटलों पर बैठे ..या फिर किसी नेता के घर जाकर बैठते रहे वही लड़के हमारे सामने देश के नेता बन कर खड़े होते है .और जिन बच्चो को आपने पसीना भा कर पद्य लिख्या..नौकरी करा के अपना जीवन सुआर्थ समझा .वही उन नेताओ को जी जी जी करते रहते है ...आप टमाटर, प्याज़ तक देख सुन कर खरीदते है .तो इस देश के नेता चुनते समय आप लोग इतने गैर जिम्मेदार कैसे हो सकते है ????????????आप को यह पसंद नही कि आपके लड़के गलत लोगो के उठे बैठे ....और आप पुरे देश को गलत हाथो में कैसे दे सकते है .....यह कैसी मानसिकता है हमारी ........आपकी बेटी बहु की तरफ अगर कोई नज़र भी उठा लेता है तो आप मरने मारने पर उतारू हो जाते है ..उन्ही को असुरक्षित रखने के लिए न जाने किस को नेता बन देते है .............यह कैसी खुदगर्जी है हमारी .........कभी कभी तो लगता है हम कभी माँ शब्द का मतलब ही नही समझ नही पाए ...........जैसे हम आप सड़क किसी को मरते हुए .घायल को देख कर रुकते नही ..वैसे ही आपने देश को संकट में देख कर एक कतरा दुःख नही होता ...उस घायल माँ का दर्द कौन समझेगा जो ऐसे सपूतो को नेता के रूप में चाहती है जो उसके दूध के क़र्ज़ को समझ सके .........क्या हम भारत कि दुर्दशा अपने कीमती वोट का प्रयोग करके रोक नही सकते ???????? क्या हम आप अभी भी घर में बैठ कर बस बात ही करते रहेंगे .................क्या हम सिर्फ २४ घंटे नही दे सकते इस राष्ट्र को .......जिस से आपके वोट का उत्तम प्रयोग हो जायेगा और हम सब को एक बेहतरीन नेता मिल जायेगा ........गन्दी नाली को साफ़ करने के लिए साफ़ पानी डाला जाता है ...बस इस बार अपनी सच्चाई .....ईमानदारी ...और समय को भार्शताचार को बहाने के लिए समप्र्पित कर दीजिये .........और इस बार के विधान सभा चुनाव में ऐसे लोगो को लाइए ...जिन्हें आपने सिर्फ जाति, धर्म ,क्षेत्र , पार्टी देख आकर वोट न दिया हो बल्कि इस लिए वोट दिया हो .....क्यों कि आप और आपका परिवार खी भी कभी भी हर अँधेरे में बिना खौफ के जा सके ...भार्शताचार मिटने के लिए अपने मत का प्रयोऊ करा यही आज अखिल भारतीय अधिकार संगठन आप से निवेदन करता है ..निवेदन इस लिए क्यों कि हमारे देश में अक्सर यह कह दिया जाता है कि मेरी मर्जी ..मई चाहे जो करू ...कोई तुम्हरे बाप का खाता हू......इसी लिए अखिल भारतीय अधिकार संगठन आपसे उस तत्थ्यो कि बात कर रहा है जिन पर सोच कर आप एक बेहतर भारत बना सकते है ....और आप भगवन नही एक बार फिर अपने नेताओ की कसम इस लिए खायेंगे क्योकि वो देवत्व के कम नही होंगे ...तो आइये अपने देश के लिए सिर्फ एक दिन ..............अपने मत का प्रयोग करे .......और राजनीती की तस्वीर बदल दे ...अखिल भारतीय अधिकार संगठन
Thursday, December 22, 2011
aurat
आज तक मै नही समझ पाया कि औरत को हम लोग कब तक समय काटने का साधन समझी जाएँगी .....जिन की कोख के पुरुष पैदा होता है .वही पुरुष अगर औरत को सिर्फ मनोरंजन का साधन समझता है तो इस दुनिया में पुरुष से ज्यादा खुद गरज कोई नही हो सकता है ........औरत एक आदमी के सहारे इस दिनिया में मनुष्य के अस्तित्व को बनाये रहती है पर उसे क्या मिलता है ........सिर्फ जिल्लत ..यह तो वही हुआ कि पेड़ फल भी दे और पत्थर के प्रहार को भी सहे......अखिल भारतीय अधिकार संगठन हमेशा से औरतो कि अस्मिता के लिए लड़ता रहा है .........लडकी का शरीर जिस तरह के समज में गुलाम बन कर रह रहा है .वो शर्मनाक है ....शरीर उसका पर अगर पिता दहेज़ न दे पाए तो वो कुआरी घर में बैठी रहे और अगर सहस करके किसी पुरुष के साथ जुड़ जाये तो वह एक ख़राब चल चलन वाली ही ज्यादा कहलाती है ...बढ़ते यौन उत्पीडन , बलात्कार , तलाक इस बात के गवाह है कि औरत कि आजादी ने उसको ज्यादा हानि पहुचाई है ......शायद यही कारन है कि औरत भी एक प्रश्न चिन्ह है .जब कि एक कुटिया ज्यादा स्वतंत्र तरीके से रहती है ..वो ज्यादा स्वतंत्र होकर तये करती है उसका साथी कौन होगा ......क्या कभी हम जानवर से ऊपर आदमी बन कर एक औरत की श्रेष्ठता को स्वीकार कर पाएंगे ..............उनके अधिकार का पैमाना क्या होगा ..........अखिल भारतीय अधिकार संगठन आपसे यही जानना चाहता है ..क्या आप बता पाएंगे
Wednesday, December 21, 2011
भारत की जनता में किसान, रिक्शा वाले, मजदूर , घर में काम करने वाली , सब्जी बेचने वाले , क्या यह वही भारतीय है जिनसे हम भारत के किसी भी आन्दोलन में भागीदारी के लिए विश्वास करते है ..............गाँधी ने देश की नब्ज पकड़ कर खुद कपडा पहनने तक से इंकार कर दिया .चाणक्य ने देश के पैसे कभी व्यक्तिगत बात तक न की .......हरीश चन्द्र, ने देश के लिया क्या नही किया .बहादुर शाह ज़फर ने अपने बच्चो की क़ुरबानी दी .......पर आज देश के लिए लड़ने वाले कितने लोग अपने बच्चो की क़ुरबानी दे रहे है ....हा दूसरो के बच्चो में जरुर देश भक्ति जगा रहे है .........कभी हिटलर की आत्मकथा मिन्काफ़ निम्फ पढ़ कर देखिये .जो राष्ट्र को बदलना चाहते है उन्हें भीड़ की जरूरत नही होती .हिटलर ने सिर्फ ३ लोगो के साथ जेर्मनी की तस्वीर बदल दी ...........वीर होरेशस ने अकेले पुरे रोम को बर्बाद होने से बचा लिया था ....फिर भारत में हर दिन राम लीला................जंतर मंतर पर भीड़ बुलानी क्यों पड़ती है ............और देश में अपने ही ल्लोग एक दुसरे पर कीचड़ क्यों उछाल रहे है ..........क्या कारन है जो अपनी गलती मान ले रहे है वही देश में भरष्टाचार मिटने के मसीहा बन गए है और जो सेष के मसीहा बने है वो भ्रष्टाचार कही पाते ही नही है ...सरकारी नौकरी करने वाले झूले लाल पार्क में जन लोक पाल का सञ्चालन कर रहे है ........जिनको अपना नेर्शिंग होम चलाना है वही बेकार दवा बात कर समाज सेवी बन रहे है............जिन्हों ने दुसरे के बच्चो की जिन्दगी बर्बाद करके अपने एन जी ओ चलाये है वही भगवन से डरते दिखाई दे रहे है .....कभी अपनी पढाई तक न कर पाने वाले देश में बच्चो की शिक्षा को लेकर पागल हुए जा रहे है ...अपने बच्चो को इंग्लिश में पढ़ा कर ........दूसरे माँ बाप के बच्चो को मलिन बस्ती में बसने की प्रेरणा दे रहे है ...........जिस देश में सच बोलने वालो से डर कर भगवान तक ने हरिश्चंद्र , कर्ण , युधिष्ठिर तक को बर्बाद कर डाला हो ............उसी देश में अगर एक आदमी दूसरे आदमी के सच से परेशां होकर उसकी हत्या कर दे या यह कह कर कि सच बोलने वाला हताश है, निराश है ..तो क्या आश्चर्य ????????????????यही तो हम देखते सुनते आये है .................क्या हम कभी सोचेंगे कि जो देश को सुधरने के लिए आगे बढ़ रहे है वो कार, हवाई जहाज़ में चलने लगते है और जिस के दम पर इस देश में आन्दोलन होते है ...वो आज भी कच्ची सडको पर चल रहा है............अंधेरो में सोता है .......पानी आज भी पोखर , तलब से आता है........वो आज भो ४००० साल पहले खड़ा है .............क्या कभी किसी ने अपनी रोटी अपना उजाला इन्हें दिया है .................कल शराब , सिगरेट पीकर देश का भविष्य बना ने वाले हमारो प्रेरणा का स्रोत बन जायेंगे पर , गाँव का आदमी फिर से किसी कि आवाज़ सुन कर फिर भर्ष्टाचार मिटने किसी पार्क, किसी मैदान, किसी राजधानी या किसी सहर कि तरफ दौड़ पड़ेगा............मेरी बात में सिर्फ भारत देखिएगा न कि कोई जाति, धर्म , छेत्र , हताशा, निराशा या नाम , फोटो, मीडिया कि चाहत में लिपटा एक भारतीय ...क्यों कि गंगा को मैला करना हमने ज़माने से सीख रखा है......जय माँ
अन्ना आज बंगलुरु में लोकायुक्त के लिए जनसभा कर रहे है ..........पर यह सब करके हम क्या पाने जा रहे है ...........एक जन सुचना अधिकार अधिनियम २००५ पाकर हम निहाल हो गए है .दूसरा जन लको पल पाकर हो जायेंगे ..........ऐसा नही कि मै नही चाहता पर सिर्फ कानून लेन का फाएदा.........आप में से कितनो ने उत्तर प्रदेश के सुचना आयोग में नियुक्त होने वाले सूचना आयुक्त के बारे में जान ना चाहा............कितनो को मालूम है कि योग में सूचना मांगने के लिए वाद दायर करने के बाद अब २-३ साल लग जाते है .क्या आयुक्त को सूचना के लिए इतना समय लगाने का अधिकार प्राप्त है .............क्या पूरे अधिनियम में खी इतने दिन तक वाद चलने का अधिकार आयुक्त को मिला है .............नही .......क्या अन्ना जी यह भरष्टाचार नही है ...........धारा १९ के अनुसार और १९(३) के अनुसार हमें साडी सूचना अधिकतम १०० दिन में मिल जनि चाहिए ..पर क्या ऐसा होता है ...............यही नही कोल्कता उच्चा न्यायालय ने २०१० में अपने एक निर्णय में खा था कि जिस दिन आयोग में केस दाखिल हो उस दिन से अधिकतम ४५ दिन में वादी को सूचना मिल जानी चाहिए ............यही नही धारा २०(!) और २०(२) में कितने लोगो से जुरमाना वसूला गया या फिर उनकी सेवा पुस्तिका पर नकारात्मक टिप्पड़ी की गयी .............कोई जनता है ............क्या अन्ना जी यह भर्ष्टाचार नही है .............धारा १७ में अब तक माननिये राज्य पाल महोदय के यहा १२८ शिकायत सूचना आयुक्तों के खिलाफ की गई पर बताया गया की सरो शिकायतों का निस्तारण हो चूका है ...........यानि जनता ने जो शिकायत की थी वो झूठी थी ,तभी तो कोई सूचना आयुक्त नही हटाया गया ...........जनता का मूल्य क्या है अन्ना जी ...........सिर्फ आपको सुन ना ही जनता नही हो सकता .उसकी गरिमा के लिए क्या हो रहा है .............क्या ऐसे ही जान लोक पाल के लिए आप जनता का आवाहन कर रहे है ............जहा अनशन करिओ को बेकार दवा खिला कर मरने की कोशिश की जाती है ,,,,,,,,,,,,जहा सरकारी नौकरी करने वाले नौकरी छोड़ कर झूले लाल पार्क में दीखते है .........क्या सरकारी नौकरी वाले इसे कर सकते है ...........क्या इसे सर्कार विरोधी नही खा जा सकता ..............क्या कोई भी अपने को डॉक्टर कह कर मंच में बैठे लोगो का इलाज कर सकता है ......................भारत की जनता को अगर सोचना है तो दिल से नही दिमाग से सोचिये कि कानूनों के ढेर पर बैठ कर हमने आज तक कौन गरिमा माये जीवन पा लिया .............दहेज़ का कानून , घरेलू हिंसा क्या नही है कानून में पर भारत कि औरत कहा है ............सब को मालूम है .....कौन लोक पाल इनको सुनेगा ..................लखनऊ के परिवार न्यालय में ज्यादातर नयायाधीश महोदय की नियुक्ति ही नही रहती ......एक औरत न्याय के आस में घुट घुट कर दम तोड़ देती है .............कौन लोक पाल उन्हें पारदर्शिता देगा ...................क्या ये सन मेरी हताशा है .......या फिर एक भारत का सच जहा जनता सिर्फ कुछ लोगो की कठपुतली है जो जनता के नाम पर खुद एक नाम हो जाते है ..जागो भारत जागो
भारत एक ऐसा देश है जहाँ भूमंडली करण के नाम पर बवाल होता है पर हम हर दिन अपने अमर क्रान्तिकारियो को बेच कर अपनी रोटी कमाने का प्रयास करते है .एक इंडिया अगेंस्ट corruption के कर्मठ कार्यकर्ता ने मुझे मोबाइल पर सन्देश देकर सूचित किया कि १९ दिसम्बर से २१ दिसम्बर के बीच लखनऊ से काकोरी ( २२ किलो मीटर लखनऊ से दूर एक स्थान जो स्वतंत्रता संग्राम का तीर्थ है ) तक साइकिल यात्रा होनी है ...आप भी शामिल होइए और इस सन्देश को जन जन तक पहुचाइए .इसी लिए मई पंहुचा रहा हु ...........पर क्या आप बता सकते है कि भगत सिंह , चन्द्र शेखर आजाद , बिस्मिल , सुखदेव, राज गुरु .के परिवार वालो के लिए हम कब चेतेंगे .............क्या फायेदा ऐसी साइकिल यात्रा से ..जो अमर सपूतो के घर दो वक्त कि रोटी नही दे पा रहे ...........क्यों नही हम आप सभी मिल कर एक ऐसा कोष बनाये और एक धनराशि उन सपूतो के घर वालो को दे तो उन्हें भी लगे कि देश भक्ति एक अच्छा काम है ..............पर हम दिल से कब इनके लिए काम करते है ....क्या आप भी सिर्फ साइकिल यात्रा में विश्वास करते है .या उन राष्ट्र भक्तो के गरिमा माये जीवन के लिए भी कुछ करना चाहते है .............शायद हम अपने देश के लोगो (अमर शहीदों )को बेच कर अपना जीवन चलने का प्रयास करते है .......ये मेरी हताशा नही .उन शहीदों की निराशा है जिन्होंने अपने परिवार को छोड़ कर देश की सेवा करने का जोखिम उठा लिया था ....................काश वो अरविन्द केजरीवाल , किरण बेदी ....से प्रेरणा लेते ..................आखिर उनके लिए भी तो राष्ट्र सेवा का कोई मतलब है ..पहले देश सेवा...........पर बाद में पता चला की इन लोगो ने पैसे में काफी हेर फेर की है .......बस इस देश की अनूठी पद्धति अपना कर पश्चाताप करके पैसा वापस करने का कदम उठा कर फिर देश भक्त बन गए ........समझ भगत सिंह जी ,,,,,,,,,,,,,,,,जय माँ
एक रोटी की दरकार थी मुझे जिस्म के लिए ,
उन्हें जिस्म की ही दरकार है एक रोटी के लिए .........
बुरा भी नही लगता बच्चो का यू ही नंगा रहना
पर अब तो बड़े भी बच्चे बन कर रहने लगे है ......
उन्हें हक़ भी था देश को अपना कह कर जीने का ,
पर अब तो हर चौराहे पर खड़े है खरीदने के लिए ............
मै तो आलोक बन कर महका उनके अंधेरो में ,
पर अब गली में खुल गई है खिड़की समेटने के लिए ..........
ऐसी न जाने कितनी पंक्तिया मेरे दिल में उठती है और हार हर बैठ जाती है .क्यों कि हम सब न जाने क्यों सो रहे है ............ज्यादातर लोग यही मानते मिलने लगे है कि आपके पास कोई काम नही है इस लिए आप ऐसी बात करने लगे है .....एक बार बैठ कर सोचिये तो आज से २५ साल पहले जब एक अनपढ़ चोरी करता था तो समझ में आता था कि वो गरीब है .पर जब आज अपढ़ लिखे ही चोर होने लगे तो लगता है कि यह हमने कैसी तरक्की पाई ...यही नही हमारे देश में स्वतंत्रता के समय जनजाति समूहों कि संख्या २१२ थी जो अब बढ़ कर ६९८ हो गयी है ........तो यह देश का कैसा विकास हुआ है ..................आज हम १०० रुपये में सही खाना नही खा सकते जबकि इसी देश में कभी सैकड़ापति कहलाते थे वह आज लखपति का जीना मुश्किल है .....जिस देश में एक रेल दुर्घटना होने पर श्री लाल बहादुर शास्त्री इस्तीफा दे देते थे ..उसी देश में हर नेता गंभीर आरोप लगने पर भी कुर्सी से चिपके रहना चाहता है ..........यह किस तरह के मूल्यों का विकास हुआ है .पहले गाँव, मोहल्ला कि लड़की , लड़का भाई बहन हुआ करते थे .वही इस देश में दहेज़, बलत्कार से लड़की पीडित होती रहती है और हम चुप चाप देखते रहते है .यह मनुष्यता कि कौन सी पशुता है ..........यानि कुल मिला कर हमने सामाजिक जानवर बन कर रहना ही बेहतर समझा है .....अखिल भारतीय अधिकार संगठन आप से निवेदन करता है .....कि एक बार तो सोचिये कि अगर हम सब नही रुके तो क्या हम अपनी अगली पीढ़ी के लिए छोड़ेंगे ..जय माँ
उन्हें जिस्म की ही दरकार है एक रोटी के लिए .........
बुरा भी नही लगता बच्चो का यू ही नंगा रहना
पर अब तो बड़े भी बच्चे बन कर रहने लगे है ......
उन्हें हक़ भी था देश को अपना कह कर जीने का ,
पर अब तो हर चौराहे पर खड़े है खरीदने के लिए ............
मै तो आलोक बन कर महका उनके अंधेरो में ,
पर अब गली में खुल गई है खिड़की समेटने के लिए ..........
ऐसी न जाने कितनी पंक्तिया मेरे दिल में उठती है और हार हर बैठ जाती है .क्यों कि हम सब न जाने क्यों सो रहे है ............ज्यादातर लोग यही मानते मिलने लगे है कि आपके पास कोई काम नही है इस लिए आप ऐसी बात करने लगे है .....एक बार बैठ कर सोचिये तो आज से २५ साल पहले जब एक अनपढ़ चोरी करता था तो समझ में आता था कि वो गरीब है .पर जब आज अपढ़ लिखे ही चोर होने लगे तो लगता है कि यह हमने कैसी तरक्की पाई ...यही नही हमारे देश में स्वतंत्रता के समय जनजाति समूहों कि संख्या २१२ थी जो अब बढ़ कर ६९८ हो गयी है ........तो यह देश का कैसा विकास हुआ है ..................आज हम १०० रुपये में सही खाना नही खा सकते जबकि इसी देश में कभी सैकड़ापति कहलाते थे वह आज लखपति का जीना मुश्किल है .....जिस देश में एक रेल दुर्घटना होने पर श्री लाल बहादुर शास्त्री इस्तीफा दे देते थे ..उसी देश में हर नेता गंभीर आरोप लगने पर भी कुर्सी से चिपके रहना चाहता है ..........यह किस तरह के मूल्यों का विकास हुआ है .पहले गाँव, मोहल्ला कि लड़की , लड़का भाई बहन हुआ करते थे .वही इस देश में दहेज़, बलत्कार से लड़की पीडित होती रहती है और हम चुप चाप देखते रहते है .यह मनुष्यता कि कौन सी पशुता है ..........यानि कुल मिला कर हमने सामाजिक जानवर बन कर रहना ही बेहतर समझा है .....अखिल भारतीय अधिकार संगठन आप से निवेदन करता है .....कि एक बार तो सोचिये कि अगर हम सब नही रुके तो क्या हम अपनी अगली पीढ़ी के लिए छोड़ेंगे ..जय माँ
आज ज्यादातर अखबारों में छपा है कि ठंडक से अब तक १६८ लोग मर चुके है ....पर ऐसा क्यों हुआ .क्या ये लोग जंगले में रह रहे थे या फिर अभी भी भारत के लोग गुलाम है जो शासक हमारे ऊपर धयान नही देते है .........या फिर हम जानवरों कि तरह इतनी जनसँख्या बढ़ाते चले जा रहे है कि कौन मर और कौन जिन्दा ..इसका कोई मूल्य ही नही रहा .......वसुधैव कुतुम्बुकम का नारा देने वाले देश में उसी के लोग मर रहे है .......क्या अनेकता में एकता का मतलब यह तो नही ..............कि हम भारतवासी तो है पर उनके जीवन में क्या हो रहा है उस से मतलब नही है ...........हम भारत ले लोग है या फिर एक देश में रहने वाले भाई बहन .......इस देश कि नातेदारी के तो क्या कहने ..............पर आज सड़क पर मर रहे लोग क्या मंगल गृह के लोग है .....हम अपनी पार्टी को जितने के लिए पूरे शहर को होर्डिंग से पाट देते है .पर उन्ही होर्डिंग्स के पैसे इतनी ठंडक में गरीबो को कम्बल नही बाट पाए .........लोक पल के लिए लोग चंदा इक्कट्ठा करते मिल जायेंगे पर गरीबो के लिए कम्बल नही खरीद नही पाए ......यह कैसा भारत है जहा आकाश कि तरह दिखाई तो नीला देता है .पर जैसे आकाश जैसी कोई चीज़ नही है और सिर्फ कालापन है.वैसे ही हमारे हाथो में भी शुन्य ही है ......पर हम दिखाना कुछ और चाहते है .अखिल भारतीय अधिकार संगठन
Subscribe to:
Comments (Atom)