आज
तक मै नही समझ पाया कि औरत को हम लोग कब तक समय काटने का साधन समझी जाएँगी
.....जिन की कोख के पुरुष पैदा होता है .वही पुरुष अगर औरत को सिर्फ
मनोरंजन का साधन समझता है तो इस दुनिया में पुरुष से ज्यादा खुद गरज कोई
नही हो सकता है ........औरत एक आदमी के सहारे इस दिनिया में मनुष्य के
अस्तित्व को बनाये रहती है पर उसे क्या मिलता है ........सिर्फ जिल्लत ..यह
तो वही हुआ कि पेड़ फल भी दे और पत्थर के प्रहार को
भी सहे......अखिल भारतीय अधिकार संगठन हमेशा से औरतो कि अस्मिता के लिए
लड़ता रहा है .........लडकी का शरीर जिस तरह के समज में गुलाम बन कर रह रहा
है .वो शर्मनाक है ....शरीर उसका पर अगर पिता दहेज़ न दे पाए तो वो कुआरी
घर में बैठी रहे और अगर सहस करके किसी पुरुष के साथ जुड़ जाये तो वह एक
ख़राब चल चलन वाली ही ज्यादा कहलाती है ...बढ़ते यौन उत्पीडन , बलात्कार ,
तलाक इस बात के गवाह है कि औरत कि आजादी ने उसको ज्यादा हानि पहुचाई है
......शायद यही कारन है कि औरत भी एक प्रश्न चिन्ह है .जब कि एक कुटिया
ज्यादा स्वतंत्र तरीके से रहती है ..वो ज्यादा स्वतंत्र होकर तये करती है
उसका साथी कौन होगा ......क्या कभी हम जानवर से ऊपर आदमी बन कर एक औरत की
श्रेष्ठता को स्वीकार कर पाएंगे ..............उनके अधिकार का पैमाना क्या
होगा ..........अखिल भारतीय अधिकार संगठन आपसे यही जानना चाहता है ..क्या
आप बता पाएंगे
No comments:
Post a Comment