भारत एक ऐसा देश है जहाँ भूमंडली करण के नाम पर बवाल होता है पर हम हर दिन अपने अमर क्रान्तिकारियो को बेच कर अपनी रोटी कमाने का प्रयास करते है .एक इंडिया अगेंस्ट corruption के कर्मठ कार्यकर्ता ने मुझे मोबाइल पर सन्देश देकर सूचित किया कि १९ दिसम्बर से २१ दिसम्बर के बीच लखनऊ से काकोरी ( २२ किलो मीटर लखनऊ से दूर एक स्थान जो स्वतंत्रता संग्राम का तीर्थ है ) तक साइकिल यात्रा होनी है ...आप भी शामिल होइए और इस सन्देश को जन जन तक पहुचाइए .इसी लिए मई पंहुचा रहा हु ...........पर क्या आप बता सकते है कि भगत सिंह , चन्द्र शेखर आजाद , बिस्मिल , सुखदेव, राज गुरु .के परिवार वालो के लिए हम कब चेतेंगे .............क्या फायेदा ऐसी साइकिल यात्रा से ..जो अमर सपूतो के घर दो वक्त कि रोटी नही दे पा रहे ...........क्यों नही हम आप सभी मिल कर एक ऐसा कोष बनाये और एक धनराशि उन सपूतो के घर वालो को दे तो उन्हें भी लगे कि देश भक्ति एक अच्छा काम है ..............पर हम दिल से कब इनके लिए काम करते है ....क्या आप भी सिर्फ साइकिल यात्रा में विश्वास करते है .या उन राष्ट्र भक्तो के गरिमा माये जीवन के लिए भी कुछ करना चाहते है .............शायद हम अपने देश के लोगो (अमर शहीदों )को बेच कर अपना जीवन चलने का प्रयास करते है .......ये मेरी हताशा नही .उन शहीदों की निराशा है जिन्होंने अपने परिवार को छोड़ कर देश की सेवा करने का जोखिम उठा लिया था ....................काश वो अरविन्द केजरीवाल , किरण बेदी ....से प्रेरणा लेते ..................आखिर उनके लिए भी तो राष्ट्र सेवा का कोई मतलब है ..पहले देश सेवा...........पर बाद में पता चला की इन लोगो ने पैसे में काफी हेर फेर की है .......बस इस देश की अनूठी पद्धति अपना कर पश्चाताप करके पैसा वापस करने का कदम उठा कर फिर देश भक्त बन गए ........समझ भगत सिंह जी ,,,,,,,,,,,,,,,,जय माँ
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