भारत की जनता में किसान, रिक्शा वाले, मजदूर , घर में काम करने वाली , सब्जी बेचने वाले , क्या यह वही भारतीय है जिनसे हम भारत के किसी भी आन्दोलन में भागीदारी के लिए विश्वास करते है ..............गाँधी ने देश की नब्ज पकड़ कर खुद कपडा पहनने तक से इंकार कर दिया .चाणक्य ने देश के पैसे कभी व्यक्तिगत बात तक न की .......हरीश चन्द्र, ने देश के लिया क्या नही किया .बहादुर शाह ज़फर ने अपने बच्चो की क़ुरबानी दी .......पर आज देश के लिए लड़ने वाले कितने लोग अपने बच्चो की क़ुरबानी दे रहे है ....हा दूसरो के बच्चो में जरुर देश भक्ति जगा रहे है .........कभी हिटलर की आत्मकथा मिन्काफ़ निम्फ पढ़ कर देखिये .जो राष्ट्र को बदलना चाहते है उन्हें भीड़ की जरूरत नही होती .हिटलर ने सिर्फ ३ लोगो के साथ जेर्मनी की तस्वीर बदल दी ...........वीर होरेशस ने अकेले पुरे रोम को बर्बाद होने से बचा लिया था ....फिर भारत में हर दिन राम लीला................जंतर मंतर पर भीड़ बुलानी क्यों पड़ती है ............और देश में अपने ही ल्लोग एक दुसरे पर कीचड़ क्यों उछाल रहे है ..........क्या कारन है जो अपनी गलती मान ले रहे है वही देश में भरष्टाचार मिटने के मसीहा बन गए है और जो सेष के मसीहा बने है वो भ्रष्टाचार कही पाते ही नही है ...सरकारी नौकरी करने वाले झूले लाल पार्क में जन लोक पाल का सञ्चालन कर रहे है ........जिनको अपना नेर्शिंग होम चलाना है वही बेकार दवा बात कर समाज सेवी बन रहे है............जिन्हों ने दुसरे के बच्चो की जिन्दगी बर्बाद करके अपने एन जी ओ चलाये है वही भगवन से डरते दिखाई दे रहे है .....कभी अपनी पढाई तक न कर पाने वाले देश में बच्चो की शिक्षा को लेकर पागल हुए जा रहे है ...अपने बच्चो को इंग्लिश में पढ़ा कर ........दूसरे माँ बाप के बच्चो को मलिन बस्ती में बसने की प्रेरणा दे रहे है ...........जिस देश में सच बोलने वालो से डर कर भगवान तक ने हरिश्चंद्र , कर्ण , युधिष्ठिर तक को बर्बाद कर डाला हो ............उसी देश में अगर एक आदमी दूसरे आदमी के सच से परेशां होकर उसकी हत्या कर दे या यह कह कर कि सच बोलने वाला हताश है, निराश है ..तो क्या आश्चर्य ????????????????यही तो हम देखते सुनते आये है .................क्या हम कभी सोचेंगे कि जो देश को सुधरने के लिए आगे बढ़ रहे है वो कार, हवाई जहाज़ में चलने लगते है और जिस के दम पर इस देश में आन्दोलन होते है ...वो आज भी कच्ची सडको पर चल रहा है............अंधेरो में सोता है .......पानी आज भी पोखर , तलब से आता है........वो आज भो ४००० साल पहले खड़ा है .............क्या कभी किसी ने अपनी रोटी अपना उजाला इन्हें दिया है .................कल शराब , सिगरेट पीकर देश का भविष्य बना ने वाले हमारो प्रेरणा का स्रोत बन जायेंगे पर , गाँव का आदमी फिर से किसी कि आवाज़ सुन कर फिर भर्ष्टाचार मिटने किसी पार्क, किसी मैदान, किसी राजधानी या किसी सहर कि तरफ दौड़ पड़ेगा............मेरी बात में सिर्फ भारत देखिएगा न कि कोई जाति, धर्म , छेत्र , हताशा, निराशा या नाम , फोटो, मीडिया कि चाहत में लिपटा एक भारतीय ...क्यों कि गंगा को मैला करना हमने ज़माने से सीख रखा है......जय माँ
It is amazing that some one is worry about the Real India....
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